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Tuesday, 28 July 2026

गुरु पूर्णिमा और नई शिक्षा परिदृश्य: भारतीय ज्ञान-परंपरा से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तक

सारांश

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का महापर्व है जो ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक आध्यात्मिक प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। महर्षि वेदव्यास की स्मृति में मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की उदासीनता का द्योतक है। वर्तमान समय में जब वैज्ञानिक कृत्रिम प्रतिभा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), डिजिटल प्रौद्योगिकी, वैश्वीकरण और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर से उद्योग है, तब गुरु की भूमिका का पुनर्पाठ आवश्यक हो जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में भी शिक्षक को शिक्षा-संस्था का स्तंभ माना गया है जिसमें उनकी भूमिका केवल ज्ञान-संप्रेषक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, नवप्रवर्तनक, वक्ता और चरित्र-निर्माता के रूप में स्थापित की गई है। यह आलेख गुरु पूर्णिमा के सांस्कृतिक एवं दार्शनिक महत्व का विश्लेषण करते हुए नई शिक्षा व्यवस्था में गुरु की भूमिका का विवेचन करता है।

प्रस्तावना

भारतीय ज्ञान-परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समकक्ष स्थान दिया गया है। उपनिषदों में गुरु को सत्य, ज्ञान और आत्मबोध का माध्यम माना गया है। शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना का अर्जन नहीं है, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास, नैतिक व्यक्तित्व का निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास है। यही दृष्टि तक्षशिला, आस्तिक और विक्रमशिला जैसी प्राचीन विश्वविद्यालयीय ईसा पूर्व की सूची में है।

इक्कीसवीं सदी में शिक्षा का स्वरूप व्यापक रूप से बदल दिया गया है। डिजिटल साधन, ऑनलाइन शिक्षण, मुफ्त ज्ञान-स्रोत और कृत्रिम कृतियों ने ज्ञान की कहानियों को सरल बना दिया है। धार्मिक ज्ञान की प्रामाणिकता, नैतिक उपयोग और मानव जाति का विकास आज भी गुरु के निर्देश पर स्वीकृत है।

नई शिक्षा नीति और गुरु की भूमिका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा को बहुसंख्यक, समावेशी, लचीली और मूल्यपरक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस नीति में शिक्षक को शिक्षा-सुधार का प्रमुख कारक माना गया है। नीति के अनुसार शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला कर्मचारी है, बल्कि छात्रों में आलोचनात्मक मूल्यांकन नहीं, सृजनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता, अनुसंधान प्रवृत्ति और संवैधानिक नैतिकता का विकास करने वाला प्रेरक है।

नई शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका निम्नलिखित आदर्शों में है-

  • ज्ञानदाता से सीखने की प्रक्रिया का सहयात्री (सुविधाकर्ता)।
  • सूचना प्रदाता से विवेकपूर्ण ज्ञान का निर्माता।
  • परीक्षा-दर्शन-शिक्षण से जीवन-कौशल आधारित शिक्षा का मार्गदर्शक।
  • विशेषअभिनेता से प्रेरणादेय नेतृत्वकर्ता।
  • पारंपरिक और आधुनिक तकनीक के मध्य संतुलन स्थापित करने वाला शिक्षाविद्।

कृत्रिम युग में गुरु की विफलता

वर्तमान समय में कृत्रिम कृति अन्य आरंभिक कार्य को सरल बनाना है। तथापि एआई सूचना दे सकती है, लेकिन मूल्यबोध, नैतिक निर्णय, सहानुभूति, सामाजिक और विशेषाधिकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल दक्ष मानव संसाधन तैयार करना नहीं है, बल्कि दोषी और शिक्षण नागरिक का निर्माण करना है। यह कार्य केवल एक वैज्ञानिक, शोधार्थी और मूल्यनिष्ठ गुरु ही कर सकता है।

इस सन्दर्भ में गुरु की भूमिका "ज्ञान के स्रोत" से आगे "ज्ञान के विवेकपूर्ण उपयोग" के मार्गदर्शक की बन जाती है।

भारतीय ज्ञान-परंपरा और समकालीन शिक्षा

भारतीय शिक्षा-दर्शन सदैव समग्र विकास (समग्र विकास) पर आधारित है। उपनिषदों, भगवद्गीता, बौद्ध एवं जैन शिक्षा-दर्शन और गुरुकुल परंपरा में आत्मानुशासन, संवाद, अनुभवात्मक अधिगम और नैतिक जीवन पर विशेष बल दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी भारतीय ज्ञान-परम्परा के इन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास है। मूलतः गुरु पूर्णिमा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा-दृष्टि का भी प्रतीक है।

उत्साह

गुरु पूर्णिमा हमें स्मरण कराती है कि शिक्षा का वास्तविक केंद्र मनुष्य का समग्र विकास है। सामान्य समय में शिक्षण के उपकरण, तकनीक और माध्यम बदले जा सकते हैं, वैज्ञानिक गुरु की मूल भूमिका-मानव निर्माण, मूल्य-संवर्धन और ज्ञान के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा-सदैव संरचना। नई शिक्षा व्यवस्था तब सफल होगी जब शिक्षक स्वयं व्याख्यान शिक्षार्थी, शिक्षक और नीति नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाएगा। गुरु पूर्णिमा एक समान सतत् ज्ञान-यात्रा का उत्सव है।

संदर्भ

  1. शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
  2. ईशावास्य, कठ एवं मुंडक उपनिषद।
  3. भगवद्गीता।
  4. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन - भारतीय दर्शन
  5. स्वामी विवेकानन्द - शिक्षा विषयक विचार
  6. यूनेस्को। मिलकर अपने भविष्य की पुनर्कल्पना: शिक्षा के लिए एक नया सामाजिक अनुबंध (2021)।

Friday, 11 July 2025

 Center for Nyas yog recently added following new services like Prakritik Chikitsa, Accupressure Treatment, Crystal Therapy, Vastu Consultancy, Palm Reading, Physical Yog along with Nyasyog Training at its center to provide a complete health and life package to people. It also conducts daily and residential Workshops

Center For Nyasyog

Shrikrishna Puram, Arya samaj Mandir Road, .R.P.S More, Danapur

Phone : 9204780693



Sunday, 15 June 2025

Experence - Blessing Ball


 हरि ओम दीदी.

मैंने भी आपके Student खुशबू शर्मा न्यास योग की शिक्षा प्राप्त की है। मेरी बेटी हुषिता जो कि 16 वर्ष की है है लगभग 2 वर्ष से फोन की लत, गलत संगति, माता-पिता की बात न मानना जैसी आद‌तों की शिकार हो गई थी। मेरी friend खुशबू शर्मा से मैने न्यास योग- Blessing ball बनाना, good Affirmation देना सिखा। 25 अप्रैल से 7 मई 25 एक महीने में मैंने अपनी बेटी में अविश्वसनीय change देखा है जो मेरा कहना नहीं मानती थी, गलत संगत, पढाई में ध्यान न देना। अब एक महिने से उसके स्वभाव में बहुत परिवर्तन है। यह परिवर्तन मेरे पति को भी नजर आया है। उन्होने मुझसे पूछा कि तुम सुबह सुबहू ये जो Affarmation देने वाला काम करती हो उससे अपने घर मे शान्ति, बेटी के स्वभाव में परिवर्तन हुआ है। जो न्यास योग के कारण ही हुआ है। मेरी Friend और दीदी ओप आपको कोटी - कोटी धन्यवाद ।

संतोष माली निम्बाहेडा 

जिला-चित्तौड़‌गढ़ 

राजस्थान

Children's Activity at Shrimad Foundation


 

summer activity by nyasyog



 

Tuesday, 29 November 2022

न्यासयोग अनुभव - स्मिता सुप्रीति

शुभ न्यास दिवस 
30.11.2022  
स्मिता सुप्रीति, रांची 
   न्यासयोग में जुड़ने से पता चला कि  सकारात्मक और नकारात्मक क्या हैं?निः+अस् न्यास के बारे में जानी।
मैं अपने मिक्सी से अंगुली कटने ,गढ्ढे में गिरकर बाहर निकलने,या बच्चों की बिमारी में,अपने पति के हर  तनाव की घड़ी में साथ रहने को ही सकारात्मक समझती थी।
मेरी गुरू ने मुझसे एक दो प्रश्न किये जिससे मुझे मेरे नकारात्मक होने का पता चला। फिर भी मैं यह समझ नहीं पा रही थी,नकारात्मकता निकालूंगी कैसे?असंभव लगा था।यह प्रश्न पर मैं कुछ ज्यादा ही मंथन करने लगी थीं।
      जब  मुझे आज के दिन के दस वाक्य मिलें और दिव्य प्रेम एवं दिव्य क्षमा मंत्र मिले।अपने को जज करने के लिए सकारात्मक और नकारात्मक मार्क्स जोड़ने और घटाने पड़े,उसी समय मैने ठान लिया इस जोड़ घटाव से अच्छा हैं कटु शब्द,आलोचना,और आक्रोश को बस यहीं छोड़ दो।उसके बाद खुद ही समझ आ गया निः+अस् का अर्थ, सकारात्मक रहेगा कैसे और नकारात्मकता को निकालेंगे कैसे।
      हमें दुसरे की मानसिकता नहीं बदलना है ,स्वयं के मानसिकता को विकसित करना है,बदलना है।मानसिकता बदलाव के लिए  बहुत कुछ खोना है।कटु शब्दों के बाण, चिड़चिड़ापन, क्रोध,किसी की हंसी उड़ाना,शिकायतें करने या सुनने,अपने तनाव ईर्ष्या, दूसरो की अवहेलना करने की आदत को खोना पड़ेगा।
            न्यासयोग पाठ्यक्रम में
सबसे महत्त्वपूर्ण है, हमारी  नकारात्मकता ही पूर्णतः समाप्त हो जाती है। 
        न्यासयोग ऊर्जा उपचार सामाजिक बदलाव में अहम् रुप से कारगर है।आज की व्यस्ताओं भरी तनाव पूर्ण जिंदगी में हरेक दिन खुद की ऊर्जाओं के साथ कम से कम आधा घंटा बिताए तो हमारे जीवन की नकारात्मकता हमें छोड़ कर चलीं जाएगी, औंर हम तन और मन दोनों से स्वस्थ हो जाएंगे।जब हम स्वयं स्वस्थ्य और सकारात्मक हो जाएंगे तो अपने आप आस पास के व्यक्ति और वातावरण भी स्वस्थ एवं सकारात्मक हो जाएंगे। यही से समाजिक बदलाव की शुरुआत होगी।
        आज के लोगों में किसी कार्य के प्रति धैर्य, विवेक एवं सामंजस्यता की कमी है,एक दूसरे से  आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण में ऊपर उठने की चाह से उनमें द्वेष,ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा इत्यादि मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं।
खाने पीने और सोचने की अनुचित आदतों से व्यक्ति कई तरह की बीमारियों से घिर जाते हैं।
न्यासयोग में जुड़ने से ,गुरु के निर्देशानुसार  बताए गए अभ्यासों को करने से हमारी ऊर्जा बिम्ब सुक्ष्म से सुक्ष्म विपदाओं से हमें तथा हमारे अपनो को संरक्षित करती हैं।पितृदोष जो हमारे समाज के लिए सबसे बड़े दोष के रूप में बताए जाते हैं और इससे बचने के लिए कई प्रकार के कर्मकांड बताए जाते हैं।
 न्यास योग में यह बहुत सहज तरीके से बताया जाता है और इसे आनन्दोत्सव के रूप में मनाकर पूर्वजों के प्रेम से जोड़ देता है। पितृदोष से मुक्ति एक पीढ़ी ही नहीं वरन् सात पीढ़ियों के लिए बताया जाता हैं।
"दिव्य प्रेम प्रगट हो,रोग शोक नष्ट हो" मंत्र के जप से सभी तरह की शारीरीक एवं मानसिक रोगों से निजात पा सकते हैं।
         मैं अपनी गुरु डा. रीता सिंह जी की सदा आभारी रहुँगी,जिन्होंने मुझे
  न्यास योग उपचार एवं तनाव प्रबंधन पद्धति के लिए अपनी शिष्य के रूप में स्वीकार किया।
यह पद्धति समग्र रूप में मन को बदल देती है। जीवन के आदर्श गुणों से परिचय करवाती है। ईर्ष्या, क्रोध, आक्रोश सबसे दूर रहने का तरीका सिखाती है। 
प्रेम, क्षमा, सफलता के साथ जीने की कला सिखाती है। इससे अच्छा और क्या चाहिए?
अपने जीवन में आएं बदलाव के आधार पर कहती हूँ कि इसका अभ्यास समाज में बढ़ जाये यो बदलाव आना ही है।
इस सुंदर आभ्यास को लाने के लिए न्यास गुरु डॉ बी पी साही को बहुत बहुत धन्यवाद। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
                  

Saturday, 23 July 2022

न्यासयोग हनुमान चालीसा चक्र अनुष्ठान

हनुमान समृद्धी अनुभव
अभिनव क्षीरसागर
 
मई के महिने में मुझे रीता मासी के द्वारा एक जॉब offer मिला जो फ़िल्म समारोह  निदेशालय दिल्ली मे था। 
मैने वह जॉब २ महीने कोट्रैट बैसिस पर किया था और अपने  ३ ईयर की परीक्षा देने के लिए में वापिस पुणे आया। 
सिर्फ १० दिन हनुमान समृद्दी करने से, आज पुनः मुझे एक नया ५ महीने का कंट्रैट उसी विभाग में मिल गया है।  मैने मेरी मम्मी को भी इस अनुष्ठान से जोड़ और कल ही उन्हे १००० धन राशी प्राप्त हुई। 
केवल २ ही दिन हुए इस प्रक्रिया से जुड कर उन्हें आर्थिक लाभ हुआ। अभी से समृद्दी का आवागमन होने लगा है। 
सब मासी की कृपा है, और हनुमान ऊर्जा का प्रभाव हमारे जीवन पर। 
आशा करता हूँ न्यास के बाकी सदस्य और बाकी सभी लोग जो इस अनुष्ठान से जुड़े ही सबको जल्दी समृद्दी प्राप्त हो। 
न्यास ऊर्जा, हनुमान ऊर्जा और मासी का बहुत बहुत धन्यवाद🙏🙇

Monday, 21 June 2021

न्यासयोग बेसिक क्लास अनुभव

प्रेम और क्षमा जैसे दो शब्दों से जिंदगी को आसान कर दिया। 

लक्ष्मी शुक्ला, लखनऊ



 मुझे न्यास योग से जुड़े हुए लगभग एक वर्ष हो गया है। इसलिए मैं सभी से न्यास योग के द्वारा हुए कुछ अनुभवों को साझा करना चाहती हूँ। 

जिसके लिए सबसे पहले मैं अपने न्यास योग प्रणेता डा0 बी0 पी0 साही जी को धन्यवाद देना चाहूंगी जो न्यास योग नामक विधा को हमारे बीच लाये। गुरु जी ने पटना, बिहार मे हीलिंग एंड अल्टर्नेटिव थेरेपी संस्थान की स्थापना की। न्यास योग हमारे शारीरिक और मानसिक तनाव को खत्म करके हमें स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाता है। 

      उसके बाद मैं अपनी ग्रैंड मास्टर डा0 रीता सिंह मैंम को धन्यवाद देना चाहूंगी जो वर्तमान में HOD, Education department at A.N. College and Founder, centre for nyas yog and alternative therapy Patna, Bihar हैं। जिन्होंने बहुत ही सहजता, सरलता प्यार से इस विधा को हमारे अंदर मे उतारने का प्रयास किया और कर रहीं हैं।

न्यास शब्द नि+अस से बना है जिसका अर्थ है निकालना और रखना। सच ये निकालने व रखने की प्रक्रिया बड़ी ही मज़ेदार और जादुई है। इस प्रक्रिया मे मानसिकता बदलाव के “आज के दिन के दस वाक्यों” को प्रतिदिन न्यास अभ्यास के द्वारा स्वयं मे धारण करने के प्रयास ने मेरे सोचने की दिशा को बदल दिया और मैं स्वयं को सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करने लगी। अब अगर मन में कभी नकारात्मक विचार आते भी हैं क्योंकि विचार तो विचार हैं कैसे भी हो सकते हैं तो सकारात्मक विचारों से तुरंत उसकी सफाई हो जाती है।  

मेरा पहला अनुभव 

अच्छी नींद का आना- न्यास मे जुड़ने से पहले मुझे कई- कई दिनों तक नींद ही नहीं आती थी, लेकिन जबसे मैं न्यास योग से जुड़ी हूं तब से मुझे बहुत ही अच्छी नींद आने लगी है। मैं रात को साढ़े तक सो जाती हूँ और प्रातः साढ़े तीन तक मेरी आँख स्वतः खुल जाती है। दिन भी अच्छा रहता है। 

मेरा दूसरा अनुभव 

भावुकता पर नियंत्रण - पहले किसी भी व्यक्ति, वस्तु, परिस्थिति की तरफ से यदि कुछ भी विपरीत हुआ तो मन बहुत ही दुखी हो जाता था और रोना आता  रहता था, पर न्यास मे आने के बाद अब ऐसा कुछ भी नहीं होता है।    

मेरा तीसरा अनुभव 

समृद्धि के सम्बंध मे- मेरे नए घर मे मेंटीनेंस से संबन्धित कुछ काम पेंडिंग पड़े थे। वह सब कंप्लीट होते चले गए। यह है न्यास का कमाल क्योंकि सकारात्मक भाव से हम जो सोचते हैं वैसा होता जाता है। जैसा हम स्वयं के बारे में सोचते हैं वैसे हम होते जाते हैं।  

मेरा चौथा अनुभव

 स्वास्थ्य के सम्बंध मे- अभी हाल मे ही मेरे पेट मे बहुत ही भारीपन सा लगता रहता था, भूख भी नहीं लग रही थी, constipation की भी समस्या हो रही थी। ऐसे मे रीता मैंम के द्वारा सिखाये गए दिव्य प्रेम मंत्र व दिव्य आरोग्य मंत्र के जाप एवं सिंबल द्वारा चिकित्सा के लिए जल को तैयार किया। फिर दिव्य प्रेम मंत्र का ध्यान करते हुए चिकित्सा जल को दिव्य जल और दिव्य औषधि के रूप मे ग्रहण किया तो मेरे पेट की समस्या से मुझे निजात मिली। 

    इसके अतिरिक्त हमारे घर मे, हमारे कार्य क्षेत्र में या कहीं भी किसी व्यक्ति, वस्तु व परिस्थिति से संबन्धित कोई समस्या होती है तो रीता मैंम के द्वारा सिखाये गए न्यास मंत्र एव उपायों का प्रयोग करते ही सब कुछ ठीक व सकारात्मक हो जाता है। 

    अंत मे मैं एक बात और साझा करना चाहूंगी कि यह सब कुछ गुरू जी के आशीर्वाद, विश्वास व रीता मैंम के प्यार और सानिध्य से ही संभव हो पाया है।  

   रीता मैंम आपका पुनः दिल से आभार वा बहुत–बहुत प्यार क्योंकि आपने प्रेम और क्षमा जैसे दो शब्दों से जिंदगी को आसान कर दिया। 

“दिव्य प्रेम प्रगट हो, रोग शोक नष्ट हो। दिव्य क्षमा प्रगट हो, रोग शोक नष्ट हो।“